*जागतिक साहित्य कला व्यक्तित्व विकास मंचचे सन्मा सदस्य ज्येष्ठ कवी गीतकार गायक संगीतकार श्री अरुणजी गांगल लिखित अप्रतिम काव्यरचना*
*“महाकवी कालिदास”*
महाकवी कालिदास प्रतिभावान सर्वश्रुत
सुंदर शब्द रचना काव्य जान्हवी विश्वदूत।।धृ।।
कालिदास साहित्याचा आस्वाद आहे अद् भूत
इंद्रधनुतील रंगांची तेजस्विता करी आकृष्ट
सर्व काव्य मनाला भावती करती आकर्षित।।1।।
महेश-पार्वती कालिदासास आराध्य दैवत
नटेश्वरास प्रार्थितसे शब्द आशय व्हावें सिद्ध
शिव-पार्वती त्यास देती सौंदर्य मनोहारीपण।।2।।
काव्य भाषा वाक्अर्थ प्रणयावर आधारीत
आशय अगम्य ध्वनिरुपकता प्रकटे सत्य
कालिदासाचे काव्य प्रासाद आहे गुण युक्त।।3।।
मेघदूत काव्य देई दिव्य संदेश विश्वश्रुत
“कुमारसंभव” “रघुवंश” शाकुंतल” प्रसिद्ध
त्यावर लिहिलेत अनेकांनी अनेक ग्रंथ।।4।।
कवी लेखक नर्तकादी कलावंतांचे दैवत
नटेश्वर चित्रकार संस्कृति करी विकसित
कला शृंगार रसिक संगीत भोक्ता आसक्त।।5।।
ऋतुचक्र अलंकार पर्यावरण ज्ञानतज्ञ
दिशा हवामान शास्त्र निपुण गणिती पंडीत
कालिदास वैज्ञानिक खगोलशास्त्री बुद्धिवंत।।6।।
©️काव्य:श्रीअरुण गांगल कर्जत जिला रायगड महाराष्ट्र.
पिन.410201.Cell.9373811677.
