*जागतिक साहित्य कला व्यक्तित्व विकास मंचच्या सन्मा सदस्या ज्येष्ठ लेखिका कवयित्री सौ.प्रांजली भट्टगांवकर लिखित अप्रतिम अभंग रचना*
*बजरंगबली*
अंजनी सुपुत्र | केसरी नंदन |
करितो वंदन | हनुमाना ||
बजरंग बली | अलौकिक शक्ती |
मनी रामभक्ती | अखंडित ||
आवडे शेंदूर | पर्ण रूईमाळा |
घालूयात गळा | मारुतीच्या ||
शिव अवतार | असे हनुमंत |
उचले पर्वत | बुटीसाठी||
बल, वेग, बुद्धी | आणि अमरत्व |
मारुती महत्व |जाणू सारे ||
जाळे शेपटीने | रावणाची लंका |
वाजे जगी डंका | मारुतीचा ||
श्रीराम सेवक | भक्त हनुमान |
गाऊ गुणगान | जोडू हात |
*सौं. प्रांजली भट्टगांवकर.*
*मीरारोड, मुंबई.*
