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वैशाख वणवा

*जागतिक साहित्य कला व्यक्तित्व विकास मंचच्या सन्मा सदस्या ज्येष्ठ लेखिका कवयित्री अरुणा दुद्दलवार लिखित अभंगायन*

 

*🍁वैशाख वणवा🍁*

 

मास वैशाखाचा | प्रखर ते ऊन।

सावली धरून | वृक्षसखा||

 

थेंब गवसेना|नदीनाले ओस|

पक्षी कासावीस | जलाविना||

 

भेगाळली माती | चरे पडलेले||

दुःख उसवले | सोसलेले||

 

सोसत उन्हाळा | उभा ऋतू गेला |

आण घनमाला | झडकरी||

 

होते लाहीलाही | जीवा अंतर्बाह्य |

कर तू सुसह्य | तगमग||

 

वैशाख वणवा | मनात जागला|

ह्रदयी चेतला | प्रीतवन्ही ||

 

दाटले आभाळ | कोसळल्या सरी|

मृद्गंध लहरी | श्वासामधे||

 

भिजली धरणी |तृप्तीचा सागर|

फुलला बहर | अंतरंगी||

 

🍁🍁🍁🍁🌿🍁🍁🍁

*अरुणा दुद्दलवार@✍️*

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