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वसंत ऋतू

*जागतिक साहित्य कला व्यक्तित्व विकास मंचच्या सन्मा सदस्या ज्येष्ठ लेखिका कवयित्री अरुणा दुद्दलवार लिखित अप्रतिम काव्यरचना*

 

*वसंत ऋतू*

 

 

वसंत ऋतू

 

मोहरे कणकण

 

सृजन क्षण।।

 

 

लुसलुशीत

 

पालवी फांदीवर

 

नव बहर।।

 

कोवळे ऊन

 

घेते चिऊ पंखात

 

उडे नभात।।

 

पळसफुले

 

दिसती अग्नी ज्वाला

 

केशरमळा।।

 

पित बहावा

 

आकाशी ते झुंबर

 

दिसे सुंदर।।

 

आम्रवृक्षाला

 

लगडला मोहर

 

गंध बहर।।

 

घुमतो कानी

 

कोकीळेचा सुस्वर

 

वसंत ज्वर।।

 

अरुणा दुद्दलवार

अरुणिमा@✍️

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