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गावाकडे जावे

*जागतिक साहित्य कला व्यक्तित्व विकास मंचच्या सन्मा सदस्या ज्येष्ठ लेखिका कवयित्री सुशीला हेमचंद्र पिंपरीकर लिखित अप्रतिम काव्यरचना*

 

*गावाकडे जावे*

 

प्रत्येक वंशाला | गाव अभिमान |

गावातली शान | भेटीगाठी ||१||

 

प्रथम भेटता | नाव गाव पृच्छा |

हर्षित यदृच्छा | एक ठाव ||२||

 

गाव मंदिरात | पहाट प्रभात |

भूपाळी स्वरात | घंटानाद ||३||

 

कथा कीर्तनात | सान थोर दंग |

अध्यात्माचा रंग | बाळकडू ||४||

 

ज्येष्ठ घरातले | सल्ला मसलत |

आदर संमत | घरीदारी ||५||

 

पारावरी सभा | शब्द प्रेमातले |

संवाद आतले | सुखदुःख ||६||

 

गावच्या जत्रेत | दुकानांची गर्दी |

गावकरी दर्दी | उद्योगात ||७||

 

शेजारपाजार | आपुला वाटतो |

सुखाने नांदतो | बंधुभाव ||८||

 

अजून शेतात | पिकपाणी गोष्टी |

वहिरीच्या मोटी | गाणी गाती ||९||

 

चुलीचे पोतेरे | शेण सारवण |

गंध आवरण | प्रातःकाळी ||१०||

 

धाब्याखाली घर | मातीचा गारवा |

पहाट पाडवा | खाटेवरी ||११||

 

साध्या माणसांना | एकत्र कुटुंब |

वाटते उत्तुंग | नातीजोड ||१२||

 

नदीवरी जावे | धुण्याच्या कामात |

गप्पांच्या नादात | मैत्रीभाव ||१३||

 

गुण गावे किती | गावकरी व्हावे |

माणसात जावे | वाटे मज ||१४||

 

सुशीला हेमचंद्र पिंपरीकर, नाशिक

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