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जल जीवन है…

*जागतिक साहित्य कला व्यक्तित्व विकास मंच की सम्मा. सदस्या लेखिका कवयित्री प्रा सौ. सुमती पवारजी की लिखी हुई बेहतरीन कविता*

 

*जल जीवन है…*

 

जल जीवन है जल जीवन है..

जल है तो हमारा कल भी है

वरना बहुत पछताओगे

ना आज रहेगा ना कल भी है..

 

जागो जागो मेरे भाईयो,

बहनो ओर बहनोईजी

हम तडपतडपकर मछली जैसे

कोई न बचाने आए जी…

 

ना पंछी रहेंगे ना वृक्षलता

माटी सुखकर बंजर होगी

ना कुएं रहेंगे ना नदियॅांभी

हरएक बनेगा फिर जोगी..

 

पानीके लिए फिर भटकेंगे

पानी की भिक्षा मॅांगेगे

हरकोई तरसेगा जल के लिए

फिर मन को अपने कोसेंगे..

 

अब पछताए क्या.. जो रात गयी

वो बात गयी

पहचानो वक्त की बातों को

पानी न रहा तो मृत्यू सही…

 

पेड लगाओ सृष्टी बचाओ

घनदाट घने जंगल बढे

जहॅां जंगल है वहॅां मंगल है

बादल भी वहीं पे रहते अडे…

 

जंगलमें बादल बरसेंगे

पंछी भी चटक चटकसे बोलेंगे

फलफूल आबादी आबाद रहे

फुलपंख फुलोंपे मंडराएंगे..

 

अब ॲांख खुली तो ठीक रहे

ॲांखोसे पानी बरसेगा

जागो जागो भाई और बहनो

हर कोई जल को तरसेगा….

 

हर बूंद बूंदमे जीवन है

वो जीवन मतलब पानी है

गर पानी मिले तो जान बची

फिर मृत्यू की निगरानी है…

 

प्रा. सौ. सुमती पवार नाशिक

(९७६३६०५६४२)

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