*जागतिक साहित्य कला व्यक्तित्व विकास मंच की सम्मानित सदस्या लेखिका कवयित्री प्रा. सौ. सुमती पवार की लिखी हुई बेहतरीन कविता*
*क्यूं उमड उमड…*
ये प्यार से पागल है दुनिया
क्यूं उमड उमड दुःख आते है..
क्यूं आते है..
भगवानकी देन है ये आयु
सुखदुःख तो आने वाले है
पतझड आती और जाती है
नवकलिका लेकिन खिलती है
क्यूं जाने का इतना दुःख है
आना जाना तो मुमकीन है..
ये प्यार से पागल है दुनिया
क्यूं उमड उमड …
रंगोगंधोका सावन है
फिर बाढ तो आनी जानी है
पत्ते खिलते गुलशन खिलता
मुरझा जाना तो मुमकीन है
ये धूप है कितनी जलती है
फिर ठंड का मौसम आता है
ये प्यार से पागल है दुनिया
क्यूं उमड उमड…
आने जाने का खेल है ये
जो आता है उसे आने दे
लाता है किस्मत अपनी अपनी
देखा है सुख का सपना सपना
वो डोर है जिसके हाथोंमे
लाता है और ले जाता है…
ये प्यार से पागल है दुनिया
क्यूं उमड उमड दुःख आते है..
ये प्यार से पागल…
प्रा.सौ.सुमती पवार नाशिक
(९७६३६०५६४२)
