*ज्येष्ठ कवी मोहनजी मराठे की लिखी हुई बेहतरीन कविता*
*ये कैसी मानसिकता है ?*
मुझ जैसे हर एक का
अपना अपना है”स्वगत ”
किस मानसिकता मे जा रहा है
आज हमारा ये”भारत ” ? /१/
रहस्यमयी एक “मायाजाल”
छूॅ रहा है “युवकोंको”
पिछे नही है “युवतियाॅ” भी
अभद्र टिपनियाॅ ” बुजुर्गोंको /२/
“नंदनवन “के बादशहा तो
होने लगे है,जगह जगह
अपना अपना “दल” कर के
ढूॅंढ रहे है,छोटीसी वजह/३/
मॉ भारती की,प्रतिमा को
“लांछित” परदेस मे करते है
युवा पिढी का,मन द्वेष से
भरने का,काम यहाँ वो करते है/४/
नही समझ में आता है
दु:शक्तियोंका ये”मनसुबा ”
इन सबको मिट्टी चखाने
कभी तो आयेगा एक “अजूबा”/५/
“तिलचट्टे” और किडे मकौडे
” उपद्रव” इनका काम है
इन सबकी है जालिम दवा
“हीट ” उसीका नाम है /६/
घर कितना भी सुंदर हो
कही न कही ये मिल जाते है
सारे घर की,मजबूती को
चूस चूस कर खाते है/७/
हालात ऐसे ही हैं देश के
सावधान रहना हैं युवकों
तिरंगे की शान बढाना
कर्तव्य सबका हैं युवकों. /८/
भगतसिंह,राजगुरू, सुखदेव
“शहीद” सारे युवक ही थे
26/11 याद करो
वो अफसर सारे युवक ही थे /९/
“जरा निंद से जाग युवक ”
बुद्धी तुम्हारी खोयी कहॉ हैं
देश युद्ध मे धकेलने की,
ये कैसी मानसिकता है. /१०/
जयहिंद, जयहिंद, जयहिंद
रचनाकार :– मोहन मराठे
