*जागतिक साकव्य विकास मंच तथा श्रीशब्द लालित्य समूहाच्या सन्मा सदस्या ज्येष्ठ लेखिका कवयित्री सौ मंजिरी अनसिंगकर लिखित अप्रतिम काव्यरचना*
*गुरूकृपा*
आषाढी पौर्णिमा| गुरूस्मरणाची||
गुरू पूजनाची| भक्तीभावे||१||
माता आणि पिता| पहिले शिक्षक
प्रथम वंदन| या गुरूंना||२||
साहित्य गुरूंची| मांदियाळी छान||
देई शिकवण ||लेखनाची ||३
पूर्वसंचिताने| गुरू कृपा योग||
नव्हे योगायोग| जीवनी या|४||
योग्य वेळीलाभे|अध्यात्मिक गुरू||
जीवन सुचारू| करीतसे||५||
गुरू कृपा दावी|सन्मार्गाची वाट||
शुद्धभाव दाट| मनांतरी||६||
गुरू कृपा योग|दे ज्ञान प्रकाश||
जीवनावकाश|तेजोमय||७||
निरपेक्ष सेवा| संकटे वारिसी||
निर्वाणी रक्षिसी|भक्तगणा||८||
गुरू कल्पतरू| जीवनी आधारू||
जीव नौका तारू| भव पार || ९||
सौ.मंजिरी अनसिंगकर नागपूर .
