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आशा.. मनमनकी..

*जागतिक साहित्य कला व्यक्तित्व विकास मंचच्या सन्मा सदस्या ज्येष्ठ लेखिका कवयित्री प्रा.सौ.सुमती पवार लिखित भावस्पर्शी काव्यरचना*

 

*आशा.. मनमनकी..*

 

आंस थी वो कणकणमें बसी है

कभी भुला ना पाएंगे

हर घरमें आशा का दीपक

रोते रोते जलाएंगे…

 

मधुर मुलायम लपकझपकती

गाती थी कितनी सुरोंमें

कसर न छोडी कमर कसी वो

खरी उतरती गानोंमे..

 

एक प्रांत ना छोडा उसने

खूब मुशाफिरी आशा की

दुनियाके सब बन गए पागल

ऐसी तान थी सुरोंकी..

 

नयापुराना कुछ ना देखा

जान छिडकती चली गयी

कौन कहेगा नहीं रही वो

हररोज उभरती नयी नयी..

 

चंदासूरज जबतक चमके

आसमान मे दमकेगी

तारा बनकर हरएक दिलोंपर

राज वो अपना करेगी…

 

मत सोचो वो चली गयी

नसनसमे यांदे ठूंस भरी

अभी चलावो स्टेशन दुनियाका

आवाज सुनोगे दर्दभरी…

 

गाने वाले सुरके सच्चे

कभी विदा ना होते वो

अलविदा ना कहते कभी भी

सुरोंकां वादा करते वो…

 

प्रा. सौ. सुमती पवार नाशिक

(९७६३६०५६४२)

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