*पारिजात साहित्य समूह प्रमुख लेखिका कवयित्री शबाना mulla की रमज़ान के अवसर पर लिखी हुई बेहतरीन कविता*
*रमजान*
भले ही कुछ दिन का था मेहमान,
बरकतों से भरा हुआ था रमजान।
बस कबूल हो जाए हमारी इबादत,
हर सांस में बसी रहे तेरी शहादत,
रोज़े पूरे होने के बड़े थे अरमान,
बरकतों से भरा हुआ था रमजान।
सही राह पर चलती रहे ज़िंदगी,
करते रहें हम अल्लाह तेरी बंदगी,
दिल में छोड़ गया सुकून का निशान,
बरकतों से भरा हुआ था रमजान।
खत्म हो रहा है तो दिल है उदास,
रमजान, तेरी जुदाई का सबको है एहसास,
फिर मिलने की दुआ करता है हर इंसान,
बरकतों से भरा हुआ था रमजान।
ईद लेकर आएगी खुशियों की बारात
हर दिल में भरेगी मोहब्बत की सौगात
सलामत रहे हर दिल में सच्चा ईमान
बरकतों से भरा हुआ था रमजान
शबाना मुल्ला
